INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 July 2021 – PuuchoIAS


 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-III

1. स्थगन प्रस्ताव

2. कृष्णा एवं गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्डों का क्षेत्राधिकार

3. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘उड़ान’ योजना

2.हबल दूरबीन

3.नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन हेतु भारत की आत्मनिर्भरता

4. पर्यावरण मंत्रालय के ज्ञापन पर रोक

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. किसान सारथी

2. उमंग ऐप

3. स्कूल नवाचार दूत प्रशिक्षण कार्यक्रम

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

स्थगन प्रस्ताव


(Adjournment motion)

संदर्भ:

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने संसद के आगामी मानसून सत्र में ‘तीन विवादास्पद कृषि कानूनों’ पर सरकार के खिलाफ लोकसभा में ‘स्थगन प्रस्ताव’ (Adjournment motion) लाने का फैसला किया है। इन ‘कृषि कानूनों’ के कारण ‘शिरोमणि अकाली दल’ पहले ही NDA गठबंधन से अलग हो चुकी है।

‘स्थगन प्रस्ताव’ को स्वीकार किए जाने के लिए इस पर 50 सांसदों के हस्ताक्षर की आवश्यक होते हैं।

पृष्ठभूमि:

पिछले वर्ष, संसद द्वारा तीन कृषि क़ानूनों- 1. कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम’, 2020 (Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act, 2020), 2. ‘कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020’ (Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Act, 2020) तथा 3. ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020’ (Essential Commodities (Amendment) Act, 2020) को पारित किया गया था।

  • इन तीनों कृषि कानूनों का किसान-संगठनों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है, और किसानों का दिल्ली की सीमाओं पर विरोध-प्रदर्शन जारी है।
  • हालांकि केंद्र सरकार और किसानों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, और चूंकि सरकार ने इन अधिनियमों को वापस लेने से सख्ती से इनकार कर दिया है, अतः अभी तक यह गतिरोध बना हुआ है।

‘स्थगन प्रस्ताव’ के बारे में:

‘स्थगन प्रस्ताव’ (Adjournment motion) को केवल लोकसभा में तत्काल सार्वजनिक महत्त्व के किसी निर्दिष्ट मामले पर सदन का ध्यान आकर्षित करने के लिये पेश किया जाता है।

  • इस प्रस्ताव में सरकार के खिलाफ निंदा के तत्त्व शामिल होते है, इसलिये राज्यसभा को इस उपकरण का उपयोग करने की अनुमति नहीं होती है।
  • चूंकि, इस प्रस्ताव से सदन के सामान्य कार्य बाधित होते हैं, इसलिए इसे एक असाधारण उपकरण के रूप में माना जाता है। सदन में स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के लिये इसको 50 सदस्यों द्वारा समर्थित होना आवश्यक होता है।
  • इस प्रस्ताव पर कम-से-कम दो घंटे तीस मिनट तक चर्चा चलनी चाहिये।

तथापि, सदन के कार्य को स्थगित करने संबंधी प्रस्ताव पेश करने के की निम्नलिखित सीमाएँ भी हैं:

  1. इस प्रस्ताव के तहत में केवल निश्चित, तथ्यात्मक, अत्यावश्यक और सार्वजनिक महत्व के मामले को उठाया जाना चाहिए।
  2. प्रस्ताव में एक से अधिक मामलों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
  3. उठाया गया विषय, हाल ही में घटी किसी विशेष घटना से संबंधित होना चाहिए।
  4. विषय का संबंध विशेषाधिकार के मामले से नहीं होना चाहिए।
  5. सदन के इसी सत्र में चर्चा किए जा चुके विषय को स्थगन प्रस्ताव के तहत फिर से नही उठाया जा सकता है।
  6. उठाया गया विषय, न्यायालय में विचारधीन मामले से संबंधित नहीं होना चाहिए।
  7. स्थगन प्रस्ताव में उठाया गया प्रश्न ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसे किसी अन्य भिन्न प्रस्ताव में उठाया जा सकता हो।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप प्रस्ताव, संकल्प और अल्पकालिक चर्चाओं में अंतर जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘स्थगन प्रस्ताव’ क्या होता है?
  2. इसके पारित होने के लिए आवश्यक शर्तें।
  3. अपवाद
  4. इसे किस सदन में पेश किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

 कृष्णा एवं गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्डों का क्षेत्राधिकार


(Jurisdiction of Krishna & Godavari River Management Boards)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा कृष्णा और गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्डों के क्षेत्राधिकार संबंधी दो राजपत्रित-अधिसूचनाएं जारी की गयी है।

इन अधिसूचनाओं में, दोनों बोर्डों को, गोदावरी और कृष्णा नदियों पर सूचीबद्ध परियोजनाओं के प्रशासन, विनियमन, संचालन और रखरखाव के संदर्भ में आवश्यक अधिकार और शक्तियां प्रदान की गयी है।

पृष्ठभूमि:

  • ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम’ 2014 (APRA) में, गोदावरी और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्डों का गठन और इन बोर्डों के कामकाज की निगरानी के लिए एक ‘शीर्ष परिषद’ के गठन का प्रावधान किया गया है।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत, केंद्र सरकार द्वारा दो नदी प्रबंधन बोर्डों का गठन किया गया है।

अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद:

संविधान के अनुच्छेद 262 में अंतर्राज्यीय जल विवादों के न्यायनिर्णयन का प्रावधान किया गया है।

  • इसके तहत, संसद, कानून द्वारा, किसी भी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण के संबंध में किसी भी विवाद या शिकायत को स्थगित करने का प्रावधान कर सकती है।
  • संसद, विधि द्वारा, प्रावधान कर सकती है कि उच्चतम न्यायालय या कोई अन्य न्यायालय ऐसे किसी विवाद या परिवाद के संबंध में अधिकारिता का प्रयोग नहीं करेगा।

जल विवादों का निपटारा करने हेतु संसद द्वारा दो कानून बनाए गए हैं:

  1. नदी बोर्ड अधिनियम (River Boards Act), 1956:
  • इसमें अंतर-राज्यीय नदी और नदी घाटियों के नियमन और विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा नदी बोर्डों के गठन का प्रावधान किया गया है।
  • इसके तहत, संबंधित राज्य सरकारों के अनुरोध पर उन्हें सलाह देने के लिए एक नदी बोर्ड का गठन किया जाता है।
  1. अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम (Inter-State Water Disputes Act), 1956:

यह अधिनियम, किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के संबंध में दो या दो से अधिक राज्यों के मध्य विवाद के निर्णय हेतु केंद्र सरकार को एक ‘तदर्थ न्यायाधिकरण’ (ad hoc tribunal) स्थापित करने का अधिकार देता है।

  • इस न्यायाधिकरण का निर्णय अंतिम होता है और विवाद से संबंधित पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है।
  • इस अधिनियम के तहत, जल विवाद के संबंध में कोई मामला ऐसे न्यायाधिकरण में भेजे जाने के बाद, उस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय और किसी अन्य न्यायालय का अधिकार क्षेत्र नहीं रह जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप केंद्र सरकार द्वारा गठित नदी बोर्डों की शक्तियों और कार्यों के बारे में जानते हैं? इनके बारे में जानने के लिए देखें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कृष्णा की सहायक नदियाँ
  2. गोदावरी की सहायक नदियाँ
  3. भारत की पूर्व बनाम पश्चिम बहने वाली नदियाँ
  4. अंतरराज्यीय नदी जल विवाद- प्रमुख प्रावधान
  5. कृष्णा और गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड- गठन, कार्य और आदेश

मेंस लिंक:

अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम (1956) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)


(National Mission for Clean Ganga)

संदर्भ:

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) की 36वीं कार्यकारी समिति की बैठक में उत्तराखंड की छह प्रदूषित नदियों के पुनरूद्धार के लिए नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

इन परियोजनाओं में कुमाऊं क्षेत्र में छह प्रदूषित नदी खंडों को शामिल किया जायेगा।

‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ के बारे में:

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियमन, 1860 के अंतर्गत 12 अगस्त 2011 को एक सोसाइटी के रुप में पंजीकृत किया गया था।

  • यह ‘पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम’ (EPA), 1986 के प्रावधानों के तहत गठित ‘राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण’ (NGRBA) की कार्यान्वयन शाखा के रूप में कार्य करता था।
  • कृपया ध्यान दें: ‘राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण’ (NGRBA) को ‘गंगा नदी के पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय परिषद’ (National Council for Rejuvenation, Protection and Management of River Ganga), जिसे ‘राष्ट्रीय गंगा परिषद’ (National Ganga Council – NGC) भी कहा जाता है, का गठन किए जाने बाद 7 अक्टूबर 2016 को भंग कर दिया गया था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत में किन संस्थानों / संगठनों की अध्यक्षता या नेतृत्व देश के प्रधान मंत्री करते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय गंगा परिषद’ (NGC) की संरचना
  2. राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण’ (NGRBA) के बारे में
  3. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा अभियान (NMCG) क्या है?
  4. नमामि गंगे कार्यक्रम के घटक
  5. विश्व बैंक समूह

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

‘उड़ान’ योजना


(UDAN scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार ने छोटे शहरों को महानगरों से जोड़ने के लिए UDAN योजना के तहत नई उड़ानों की घोषणा की है।

इन उड़ानों के लिए देश में कम उपयोग किए जाने वाले हवाई अड्डों का उपयोग किए जाते हैं और इनके माध्यम से देशवासियों को सस्ती उड़ानें प्रदान करने का प्रयास किया जाता है।

पृष्ठभूमि:

केंद्र सरकार द्वारा, UDAN योजना (Ude Desh Ka Aam NagrikUDAN)  के नाम से एक क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत 100 कम उपयोग किए जाने वाले हवाई अड्डों के संचालन और कम से कम 1,000 हवाई मार्गों को शुरू करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

उड़ान’ योजना के बारे में:

इस योजना का उद्देश्य देश के दूरस्थ और क्षेत्रीय क्षेत्रों से संपर्क बढ़ाना और हवाई यात्रा को वहनीय बनाना है।

  • यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का एक प्रमुख घटक है और इसे जून 2016 में लॉन्च किया गया था।
  • इस योजना के तहत, UDAN की फ्लाइट्स में लगभग आधी सीटें रियायती किराए पर दी जाती हैं, और भाग लेने वाले कैरीएर्स को एक निश्चित राशि की ‘व्यवहार्यता अंतराल निधि’ (viability gap fundingVGF) प्रदान की जाती है, जोकि केंद्र और संबंधित राज्यों के मध्य साझा की जाती है।
  • इस योजना को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जाएगा।
  • यह योजना 10 साल तक जारी रहेगी और बाद में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

उड़ान 4.0:

उड़ान के चौथे दौर (UDAN 4.0) को दिसंबर 2019 में पूर्वोत्तर क्षेत्रों, पहाड़ी राज्यों और द्वीपों पर विशेष ध्यान देने के साथ शुरू किया गया था।

  • भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) द्वारा पहले ही विकसित किए गए हवाई अड्डों को इस योजना के तहत व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF) के लिए उच्च प्राथमिकता दी गई है।
  • उड़ान 0 के तहत, हेलीकॉप्टर और सी-प्लेन के संचालन को भी शामिल किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारतीय निजी वायु परिवहन सेवा प्रदाताओं के लिए विदेशों के लिए उड़ाने भरने के लिए वर्ष 2004 में  5/20 मानदंड लाया गया था। लेकिन, 2016 की राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति ने इसे 0/20 से बदल दिया। क्यों?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UDAN योजना कब शुरू की गई थी?
  2. योजना का कार्यान्वयन और वित्त पोषण
  3. राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का अवलोकन
  4. इस योजना के तहत, हवाई किरायों के लिए सब्सिडी देने के लिए व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF) कौन प्रदान करता है?
  5. योजना के तहत राज्य सरकारों की भूमिका

मेंस लिंक:

UDAN योजना के प्रदर्शन पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

हबल टेलीस्कोप


(Hubble telescope)

संदर्भ:

कुछ दिन पहले ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ (Hubble Space Telescope) के एक पेलोड कंप्यूटर में समस्या आ जाने से इसने काम करना बंद कर दिया था। हाल ही में, नासा ने इसे ‘हबल वेधशाला’ (Hubble observatory) पर लगे एक बैकअप कंप्यूटर से बदलने में सफल हो गया है।

पृष्ठभूमि:

13 जून को, 1980 के दशक के एक पेलोड कंप्यूटर में खराबी आने के बाद से ‘हबल टेलीस्कोप’ ने काम करना बंद कर दिया था। इसी कंप्‍यूटर की मदद से टेलीस्कोप में विज्ञान से जुड़े उपकरणों को नियंत्रित किया जाता था।

‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ के बारे में:

  1. हबल स्पेस टेलीस्कोप (HST) अंतरिक्ष में स्थापित एक विशाल दूरबीन है। हबल टेलीस्कोप को नासा द्वारा वर्ष 1990 में लॉन्च किया गया था।
  2. इसे ‘यूरोपियन स्पेस एजेंसी’ (ESA) के सहयोग से नासा (NASA) द्वारा निर्मित किया गया था।
  3. हबल एकमात्र ऐसा टेलीस्कोप है, जिसकी अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा अंतरिक्ष में मरम्मत की जा सकती है।
  4. दृश्यमान ब्रह्मांड की सीमाओं का पार करते हुए, हबल स्पेस टेलीस्कॉप अपने कैमरों के माध्यम से अंतरिक्ष में गहराई तक अवलोकन करता है। ये कैमरे, अवरक्त (infrared) से लेकर पराबैगनी (ultraviolet) तक संपूर्ण प्रकाश वर्णक्रम (optical spectrum) को देखने में सक्षम हैं।
  5. हबल स्पेस टेलीस्कोप प्रत्येक 95 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा करता है।

 

उपलब्धियां:

  1. हबल स्पेस टेलीस्कोप ने प्लूटो के चारो और चंद्रमाओं की खोज करने में मदद की है।
  2. हबल द्वारा किए गए प्रेक्षणों के आधार पर ब्लैक होल के अस्तित्व के बारे में साक्ष्य सामने आए हैं।
  3. इसके द्वारा गैस और धूल के उग्र बादलों को पार करते हुए तारों का उत्पन्न होना भी देखा गया है।
  4. हबल टेलिस्कोप ने छह आकाशगंगाओं का आपस में विलय होने का भी प्रेक्षण किया।
  5. 11 फरवरी, 2021 को हबल ने ब्लैक होल के एक छोटे समूहन के बारे में जानकारी दी थी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

इस वर्ष के अंत तक ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ नामक एक नया और अधिक शक्तिशाली टेलिस्कोप तैनात किया जाएगा। इसके बारे में अधिक जानने हेतु पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हबल स्पेस टेलीस्कोप के बारे में
  2. जेम्स वेब टेलीस्कोप के बारे में
  3. ब्लैक होल क्या है?

मेंस लिंक:

हबल टेलीस्कोप की उपलब्धियों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन हेतु भारत की आत्मनिर्भरता


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा “आत्मनिर्भर भारत – नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन हेतु आत्मनिर्भरता” विषय पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था।

ऊर्जा अवस्थांतर (Energy Transition) में भारत किस प्रकार एक विश्व नेता के रूप में उभर रहा है?

  1. भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकास दर, इस क्षेत्र में विश्व की सर्वाधिक तेज दरों में से एक है।
  2. भारत द्वारा पेरिस में आयोजित COP-21 में संकल्प किया गया कि, वर्ष 2030 तक, इसकी विद्युत् उत्पादन क्षमता का 40% उत्पादन गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से होगा।
  3. भारत ने वर्ष 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
  4. देश में ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ के तहत हर गांव और हर बस्ती को जोड़कर और सौभाग्य योजना के अंतर्गत हर घर को जोड़कर, बिजली का कनेक्शन तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान की गई है।
  5. कोविड- 19 का प्रभाव होने के बाबजूद, भारत पहले ही 200 GW की मांग को छू चुका है।
  6. भारत, हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया के क्षेत्र में भी अग्रणी के रूप में उभर रहा है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना:

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY), भारत सरकार की प्रमुख पहलों में से एक है और विद्युत मंत्रालय का एक प्रमुख कार्यक्रम है।

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण विद्युतीकरण और बिजली वितरण बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए तत्कालीन राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (RGGVY) योजना को DDUGJY योजना में समाहित किया गया है।

उद्देश्य:

  1. सभी गांवों और घरों का विद्युतीकरण करना।
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं गैर कृषि उपभोक्ताओं की आपूर्ति को विवेकपूर्ण तरीके से बहाल करने की सुविधा हेतु कृषि और गैर कृषि फीडरों का पृथक्करण करना।
  3. आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार हेतु उप-पारेषण और वितरण की आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण एवं आवर्धन करना।
  4. घाटे को कम करने के लिए मीटर लगाना।

कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी: ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड ( Rural Electrification Corporation Limited – REC)।

‘सौभाग्य’ योजना:

(Saubhagya scheme)

प्रधान मंत्री सहज बिजली हर घर योजना (पीएम सौभाग्य) को सितंबर 2017 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य दिसंबर 2018 तक सभी घरों में बिजली पहुंचाना था।

  • इस लक्ष्य को आगे बढ़ाकर 31 मार्च, 2019 कर दिया गया।
  • अंततः केंद्र द्वारा सभी ‘इच्छुक’ घरों को बिजली कनेक्शन दिए जा चुकने संबंधी घोषणा कर दी गयी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप UDAY योजना के बारे में जानते हैं इसके तहत भारत की डिस्कॉम के वित्तीय और प्रदर्शन में बदलाव की परिकल्पना की गई है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सौभाग्य योजना के बारे में।
  2. ‘ग्रामीण विद्युतीकरण निगम’ के बारे में।
  3. DDUGJY के बारे में
  4. ग्रीन हाइड्रोजन के बारे में

मेंस लिंक:

अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पर्यावरण मंत्रालय के ज्ञापन पर रोक


संदर्भ:

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।

ज्ञापन में ‘पर्यावरणीय प्रभाव आकलन’ (EIA) अधिसूचना, 2006 के तहत पर्यावरणीय मंजूरी के बिना शुरू की गई परियोजनाओं को कार्योत्तर मंजूरी (post facto clearance) देने के लिए एक प्रक्रिया जारी की गई थी।

संबंधित प्रकरण:

पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006 (Environmental Impact Assessment (EIA) notification, 2006) के तहत परियोजनाओं के लिए पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया है, एयर इसमें तहत कार्योत्तर मंजूरी देने का कोई प्रावधान नहीं है।

  • पर्यावरण मंत्रालय का ज्ञापन, इस क़ानून का उल्लंघन करने वालों को पिछले दरवाजे से अनुमति प्रदान कर सकता है।
  • ज्ञापन के माध्यम से, EIA अधिसूचना का उल्लंघन करने वाले मंजूरी प्राप्त कर सकते हैं और उल्लंघनों को कानूनी बना सकते हैं।
  • पर्यावरणीय न्याय के लिए ‘कार्योत्तर मंजूरी’ का प्रावधान प्रतिकूल भी है।
  • यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों और ‘पर्यावरणीय निर्णय लेने में लोगों की भागीदारी’ के अधिकार के भी विरुद्ध है।
  • यह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का भी उल्लंघन करता है।

 

पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) के बारे में:

पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), सतत विकास हेतु प्राकृतिक संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

  • इसका उद्देश्य प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की पहचान, जांच, आकलन और मूल्यांकन करना है।
  • भारत में पहली बार EIA मानदंडों को वर्ष 1994 में, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया गया था। इसके तहत, प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच, उपयोग और प्रभावित (प्रदूषक) गतिविधियों को विनियमित करने के लिए एक कानूनी ढांचा स्थापित किया गया।
  • उस समय से, पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने के लिए, हर विकास परियोजना को EIA प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
  • EIA अधिसूचना 1994 को वर्ष 2006 में संशोधित करके एक नया पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) मसौदा जारी किया गया।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘एस्पू (ईआईए) कन्वेंशन’ (Espoo (EIA) Convention) के बारे में सुना है, इसमें किसी परियोजना के प्रारंभिक चरण में कुछ गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने के लिए पक्षकारों के दायित्वों को निर्धारित किया गया है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. EIA प्रक्रिया
  2. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986- मुख्य प्रावधान
  3. मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय के बारे में
  4. संविधान का अनुच्छेद 253
  5. संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक कौन होते हैं?
  6. ड्राफ्ट ईआईए अधिसूचना 2020 में मुख्य प्रावधान।

मेंस लिंक:

भारतीय संदर्भ में पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया के महत्व को समझाइए। इसके साथ जुड़ी

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


किसान सारथी

  • हाल ही में, किसानों को उनकी वांछित भाषा में ‘सही समय पर सही जानकारी’ प्राप्त करने की सुविधा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘किसान सारथी’ लॉन्च किया गया है।
  • इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसान सीधे वैज्ञानिकों से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर व्यक्तिगत सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

 

उमंग ऐप

उमंग मोबाइल ऐप (Unified Mobile Application for New-age Governance – UMANG), भारत सरकार का एकल, एकीकृत, सुरक्षित, मल्टी-चैनल, मल्टी-प्लेटफॉर्म, बहुभाषी, बहु-सेवा मोबाइल ऐप है। यह केंद्र और राज्यों की विभिन्न संस्थाओं की अत्यधिक प्रभावी सेवाओं तक पहुंच प्रदान करता है।

  • इसे वर्ष 2017 में लॉन्च किया गया।
  • वर्तमान में, उमंग 257 विभागों और 32 राज्यों से लगभग 1251 सेवाएं प्रदान करता है और लगभग 20,280 उपयोगिता बिल भुगतान सेवाएं और कई अन्य सेवाएं भविष्य में आने वाली हैं।

 

स्कूल नवाचार दूत प्रशिक्षण कार्यक्रम

(School Innovation Ambassador Training Program)

  • यह स्कूली शिक्षकों के लिए यह अभिनव और अपनी तरह का अनूठा प्रशिक्षण कार्यक्रम है।
  • इसका उद्देश्य 50,000 स्कूल शिक्षकों को नवाचार, उद्यमिता, आईपीआर, डिजाइन थिंकिंग, उत्पाद विकास, विचार सृजन आदि के बारे में प्रशिक्षण देना है।
  • शिक्षण केवल ऑनलाइन माध्यम से दिया जाएगा।
  • कार्यक्रम को शिक्षा मंत्रालय और एआईसीटीई के इनोवेशन सेल द्वारा डिज़ाइन किया गया है।

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