INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 July 2021 – PuuchoIAS


 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. ‘प्रसाद’ योजना

 

सामान्य अध्ययन-II

1. दलबदल-रोधी कानून

2. न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाओं के विकास हेतु केंद्र प्रायोजित योजना

3. धारा 66A के तहत दर्ज मामले रद्द किए जाएं: केंद्र सरकार

4. अफ़ग़ानिस्तान में भारत का निवेश

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पशुधन क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज

2. मसौदा ‘ड्रोन नियम 2021’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘इंटरनेशनल कॉपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर – रुद्राक्ष’

2. विश्व युवा कौशल दिवस

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

‘प्रसाद’ योजना


(PRASHAD Scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रसाद (PRASHAD) परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। इन परियोजनाओं में ‘पर्यटक सुविधा केंद्र’ और ‘अस्सी घाट’ से ‘राजघाट’ तक क्रूज बोट का संचालन आदि शामिल है।

PRASHADयोजना के बारे में:

  1. ‘राष्ट्रीय तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान’ अर्थात ‘प्रसाद’ (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive- PRASHAD), भारत सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित एक केंद्रीय योजना है।
  2. इसे वर्ष 2014-15 में पर्यटन मंत्रालय द्वारा, तीर्थयात्रा और विरासत स्थलों के एकीकृत विकास के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
  3. इस योजना के उद्देश्यों में, तीर्थयात्रा और विरासत स्थलों पर बुनियादी ढांचे, जैसेकि सड़क, रेल और जल परिवहन के माध्यम से इन जगहों के प्रवेश-स्थलों, आखिरी छोर तक कनेक्टिविटी, पर्यटन की बुनियादी सुविधाओं का विकास करना शामिल है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की ‘हृदय’ (HRIDAY) योजना के बंद होने के बाद, विरासत स्थलों के विकास को प्रसाद’ योजना में शामिल कर दिया गया।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना के प्रमुख बिंदु
  2. कार्यान्वयन
  3. योजना के तहत कवर किए गए शहर

मेंस लिंक:

प्रसाद योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

दलबदलरोधी कानून


(Anti-defection law)

संदर्भ:

हाल ही लोकसभा सचिवालय द्वारा तीन सांसदों को ‘दलबदल विरोधी कानून’ के संदर्भ में एक नोटिस जारी किया गया है। इन सांसदों के राजनीतिक दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष, इन सदस्यों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए याचिका दायर की गयी है।

लोकसभा सचिवालय ने इन ‘संसद सदस्यों’ से पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपनी टिप्पणी देने को कहा है।

‘दलबदल विरोधी कानून’ क्या है?

(Anti-defection law)

संविधान में, 52 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा एक नयी अनुसूची (दसवीं अनुसूची) जोड़ी गई थी।

  • इस संशोधन का उद्देश्य सांसदों और विधायकों द्वारा, अपने मूल राजनीतिक दलों, जिनके टिकट पर चुनाव लड़ा था, को छोड़ कर अन्य दलों में शामिल होने पर रोक लगा कर, सरकारों में स्थिरता लाना था।
  • इसके अंतर्गत राजनीतिक निष्ठा के परिवर्तन करने वाले सदस्यों को संसदीय सदस्यता से वंचित करने तथा मंत्री बनने पर प्रतिबंध करने का प्रावधान किया गया है।

निरर्हता (Disqualification) के आधार:

यदि किसी राजनीतिक दल से संबंधित सदन का सदस्य:

  1. स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता त्याग देता है, अथवा
  2. यदि वह सदन में अपने राजनीतिक दल के निर्देशों के विपरीत मत देता है अथवा मतदान में अनुपस्थित रहता है तथा अपने राजनीतिक दल से उसने पंद्रह दिनों के भीतर क्षमादान न पाया हो।
  3. यदि चुनाव के बाद कोई निर्दलीय उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है।
  4. यदि विधायिका का सदस्य बनने के छह महीने बाद कोई नामित सदस्य (Nominated Member) किसी पार्टी में शामिल होता है।

कानून के तहत अपवाद:

हालांकि, सदन के सदस्य कुछ परिस्थितियों में निरर्हता के जोखिम उठाए बिना अपनी पार्टी बदल सकते सकते हैं।

  1. इस विधान में किसी दल के द्वारा किसी अन्य दल में विलय करने करने की अनुमति दी गयी है बशर्ते कि उसके कम से कम दो-तिहाई विधायक विलय के पक्ष में हों।
  2. ऐसे परिदृश्य में, अन्य दल में विलय का निर्णय लेने वाले सदस्यों तथा मूल दल में रहने वाले सदस्यों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

पीठासीन अधिकारी के निर्णय की न्यायिक समीक्षा:

  1. इस विधान के प्रारम्भ में कहा गया है कि पीठासीन अधिकारी का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन नहीं होगा। वर्ष 1992 में उच्चत्तम न्यायालय ने इस प्रावधान को खारिज कर दिया तथा इस सन्दर्भ में पीठासीन अधिकारी के निर्णय के विरूद्ध उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में अपील की अनुमति प्रदान की।
  2. हालाँकि, यह तय किया गया कि पीठासीन अधिकारी के आदेश के बिना कोई भी न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जायेगा।

पीठासीन अधिकारी द्वारा निर्णय लेने के लिए समय-सीमा:

कानून के अंतर्गत, पीठासीन अधिकारियों को अयोग्यता की याचिका पर फैसला करने के लिए कोई समय सीमा नहीं निर्धारित नहीं की गयी है। ‘दल-बदल’ के मामलें में कोई भी अदालत केवल पीठासीन अधिकारी द्वारा निर्णय लेने के बाद ही हस्तक्षेप कर सकती हैं,  अतः याचिकाकर्ता के पास एकमात्र विकल्प, मामले पर निर्णय होने तक इंतजार करना होता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप 1992 के किहोतो होलोहन मामले के बारे में जानते हैं, जिसमें अदालत ने विधायकों की अयोग्यता के मामलों पर फैसला करने में अध्यक्ष के लिए प्राप्त विवेकाधिकार शक्ति को बरकरार रखा था? इस मामले में और कौन से फैसले दिए गए थे?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दल-बदल कानून संबधित विभिन्न समितियों और आयोगों के नाम
  2. समिति तथा आयोग में अंतर
  3. पीठासीन अधिकारी तथा न्यायिक समीक्षा का निर्णय
  4. राजनीतिक दलों के विलय तथा विभाजन में अंतर
  5. क्या पीठासीन अधिकारी पर दलबदल विरोधी कानून लागू होता है?
  6. संबंधित मामलों में उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय

मेंस लिंक:

दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। क्या यह कानून अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाओं के विकास हेतु केंद्र प्रायोजित योजना


(Centrally Sponsored Scheme (CSS) for Development of Infrastructure Facilities for Judiciary)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ (Centrally Sponsored Scheme – CSS) को मार्च 2026 तक अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है।

इस पर आने वाली कुल 9,000 करोड़ रुपये की लागत में केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी 5,357 करोड़ रुपये होगी, जिसमें ग्राम न्यायालय योजना और न्याय दिलाने एवं कानूनी सुधार से जुड़े एक राष्ट्रीय मिशन के जरिए मिशन मोड में इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 50 करोड़ रुपये की लागत भी शामिल है।

न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाओं के विकास हेतु ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ के बारे में:

  • यह ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ (CSS) 1993-94 से चल रही है।
  • केन्द्र सरकार, इस योजना के माध्यम से सभी राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों में न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers – JO) के लिए न्यायालय भवनों और आवासीय क्वार्टरों के निर्माण के लिए राज्य सरकारों के संसाधनों में वृद्धि करती है।

योजना का महत्व/लाभ:

  • यह सीएसएस योजना पूरे देश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों/न्यायिक अधिकारियों के लिए सुसज्जित कोर्ट हॉल और आवासीय सुविधाओं की उपलब्धता में वृद्धि करेगी।
  • इससे न्यायपालिका के समग्र कामकाज और प्रदर्शन में सुधार करने में मदद मिलेगी।
  • ग्राम न्यायालयों को दी जाने वाली निरंतर सहायता आम आदमी को उसके दरवाजे पर त्वरित, पर्याप्त और किफायती न्याय मुहैया कराने में भी प्रोत्साहन देगी।

ग्राम न्यायालय’ क्या हैं?

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय प्रणाली तक त्वरित और आसान पहुँच उपलब्ध कराने के लिए ‘ग्राम न्यायालय अधिनियम’, 2008 के तहत ‘ग्राम न्यायालयों’ या ‘ग्राम अदालतों’ (Gram Nyayalayas) की स्थापना की गयी है।

‘ग्राम न्यायालय अधिनियम’ ‘2 अक्टूबर 2009 से लागू है

अधिकार – क्षेत्र:

  • ग्राम न्यायालय का अधिकार क्षेत्र, संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श से राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट क्षेत्र पर विस्तारित होता है।
  • ग्राम न्यायालय, इस संबंध में व्यापक प्रचार करने के बाद, अपने अधिकार क्षेत्र में किसी भी स्थान पर ‘मोबाइल कोर्ट’ के रूप में कार्य कर सकते हैं।
  • इनके पास, अपराधों के संबंध में दीवानी और फौजदारी दोनों क्षेत्राधिकार होते हैं।
  • ग्राम न्यायालयों को कुछ ऐसे साक्ष्यों को स्वीकार करने की शक्ति दी गई है जो, आमतौर पर ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ (Indian Evidence Act) के तहत स्वीकार्य नहीं होते हैं।

संरचना:

ग्राम न्यायालयों की अध्यक्षता एक ‘न्यायाधिकारी’ द्वारा की जाती है, जिसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समान शक्तियां, वेतन और लाभ प्राप्त होते हैं। इन न्यायाधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

ग्राम न्यायालय, पहली बार में विवाद के समझौता और निपटारे का अवसर देते हैं। क्या आप सुलह और मध्यस्थता’ के बीच अंतर जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ग्राम न्यायालयों के बारे में
  2. अधिकार क्षेत्र
  3. संरचना
  4. शक्तियां
  5. न्यायपालिका के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) के बारे में।

मेंस लिंक:

‘ग्राम न्यायालय अधिनियम’ के महत्व की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

धारा 66A के तहत दर्ज मामले रद्द किए जाएं: केंद्र सरकार


संदर्भ:

हाल ही में ‘केंद्रीय गृह मंत्रालय’ ने राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम’ की निरसित की जा चुकी धारा 66A के तहत दर्ज  किए गए मामलों को तत्काल वापस लेने के लिए कहा है।

हाल ही में ‘सुप्रीम कोर्ट’ ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया था, कि शीर्ष अदालत द्वारा इस धारा को रद्द करने के छह साल बाद भी इसे लागू किया जा रहा है। इसके बाद ‘गृह मंत्रालय’ ने यह निर्देश जारी किया है।

संबंधित प्रकरण:

‘आईटी आधिनियम की धारा 66A’ को समाप्त किए जाने के 7 साल बाद भी, मार्च 2021 तक, 11 राज्यों की जिला अदालतों के समक्ष कुल 745 मामले अभी भी लंबित और सक्रिय हैं, जिनमें आरोपी व्यक्तियों पर आईटी अधिनियम की धारा 66A (Section 66A of the IT Act) के तहत अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा रहा है।

पृष्ठभूमि:

धारा 66A  को “क्रूर” करार दिया गया था क्योंकि इसके तहत कई निर्दोष व्यक्तियों की गिरफ्तारी की अनुमति दी गई थी। इस धारा को खत्म करने के लिए एक जन आक्रोश भड़क उठा था। इन सब कारणों से, सुप्रीम कोर्ट द्वारा, मार्च 2015 में, श्रेया सिंघाल बनाम भारत संघ मामले में इसे असंवैधानिक करार देते हुए निरसित कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 66A को हटाए जाने के कारण:

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, धारा 66A संविधान के अनुच्छेद 19(1) (a) के तहत, मनमाने ढंग से, अतिशय पूर्वक और असमान रूप से ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार’ पर हमला करती है, और इन अधिकारों और इन पर लगाए जाने वाले उचित प्रतिबंधों के बीच संतुलन को बिगाड़ती है। इसके अलावा, प्रावधान के तहत अपराधों की परिभाषा, व्याख्या के लिए ‘खुली हुई’ (open-ended) और अपरिभाषित है।

  • अदालत के अनुसार, प्रावधान में “पूरी तरह से खुले और अपरिभाषित” अभिव्यक्तियों / पदों का इस्तेमाल किया गया है और इस्तेमाल की जाने वाली हर अभिव्यक्ति अर्थ में “अस्पष्ट” है।
  • जो अभिव्यक्ति किसी एक के लिए ‘अपमानजनक’ हो सकती है, वह दूसरे के लिए ‘अपमानजनक’ नहीं भी हो सकती है।
  • जो अभिव्यक्ति किसी को खीज या असुविधा का कारण हो सकती है, वह दूसरे को अभिव्यक्ति या असुविधा का कारण नहीं भी हो सकती है।
  • यहां तक ​​कि ‘लगातार’ (Persistently) अभिव्यक्ति / पद भी पूरी तरह से गलत है।

धारा 66A क्या है?

धारा 66A (Section 66A), कंप्यूटर या किसी अन्य संचार उपकरण जैसे मोबाइल फोन या टैबलेट के माध्यम से “आपत्तिजनक” संदेश भेजने पर सजा को परिभाषित करती है। इसके तहत दोषी को अधिकतम तीन साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

संविधान में, अनुच्छेद 137 के तहत, सर्वोच्च न्यायालय को अपने किसी भी निर्णय या आदेश की समीक्षा करने की शक्ति दी गयी है। इसका उपयोग कब किया जाता है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आईटी एक्ट की धारा 66A के बारे में
  2. कार्यान्वयन
  3. छूट
  4. सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 66A को हटाए जाने के कारण

मेंस लिंक:

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66ए को असंवैधानिक क्यों ठहराया? इस फैसले के संवैधानिक और व्यावसायिक निहितार्थों की जांच कीजिए। आलोचनात्मक चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

 अफ़ग़ानिस्तान में भारत का निवेश


संदर्भ:

भारत के लिए अफ़ग़ानिस्तान में जारी वर्तमान संकट चिंता का विषय है। अमेरिका और नाटो (NATO) सैन्य बलों की वापसी के बाद तालिबान द्वारा देश के कई हिस्सों पर कब्जा किया जा चुका है।

भारत की चिंता के कारण:

  1. अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद देश में भारत की कोई भूमिका होने की संभावना कम हो सकती है, और सबसे खराब स्थिति में, इसकी राजनयिक उपस्थिति भी समाप्त हो सकती है।
  2. इससे अफगानिस्तान के साथ, जिस सदियों पुराने रिश्ते को फिर से नया करने में लगभग 20 वर्षों का समय लगा था, उनमे उलटफेर हो सकता है।
  3. तालिबान की संभावित जीत से, अफ़ग़ानिस्तान की विभिन्न परियोजनाओं – बांधों, सड़कों, व्यापार अवसंरचनाओं में किए गए 3 अरब डॉलर के भारतीय निवेश को भी खतरा हो सकता है।

अफगानिस्तान के लिए भारत की सहायता:

अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में भारत द्वारा शुरू की गई 400 से अधिक परियोजनाओं से आज अफगानिस्तान का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं है।

भारत-अफगानिस्तान रणनीतिक साझेदारी समझौते, 2011 के तहत भारत ने अफगानिस्तान के बुनियादी ढांचे और संस्थानों के पुनर्निर्माण; शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में क्षमता निर्माण हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया था।

  1. सलमा बांध (SALMA DAM): यह अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रांत में अवस्थित 42MW क्षमता का बाँध है। यह जलविद्युत और सिंचाई परियोजना, कई बाधाओं को पार करते हुए पूरी हुई थी और वर्ष 2016 में इसका उद्घाटन किया गया था। ‘सलमा बांध’ के लिए ‘अफगान-भारत मैत्री बांध’ के रूप में जाना जाता है।
  2. ज़रांज-डेलाराम हाईवे (ZARANJ-DELARAM HIGHWAY): भारत की अफ़ग़ानिस्तान में दूसरी हाई-प्रोफाइल परियोजना, ‘सीमा सड़क संगठन’ (BRO) द्वारा निर्मित 218 किलोमीटर लंबा ‘ज़रांज-डेलाराम राजमार्ग’ है। ज़रांज, अफगानिस्तान-ईरान सीमा के नजदीक स्थित है। 150 मिलियन डॉलर लागत वाला यह राजमार्ग ‘खाश रुड नदी’ (Khash Rud river) के साथ-साथ ज़रांज के उत्तर-पूर्व में स्थित डेलाराम तक जाता है।
  3. अफ़ग़ान संसद (PARLIAMENT): काबुल में अफ़ग़ानिस्तान के संसद भवन का निर्माण, 90 मिलियन डॉलर की लागत से भारत द्वारा किया गया। इस संसद भवन को वर्ष 2015 में खोला गया था और इस भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
  4. स्टोर पैलेस (STOR PALACE): भारत ने काबुल में ‘स्टोर पैलेस’ का पुनर्निर्माण किया और वर्ष 2016 में अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और प्रधान मंत्री मोदी ने इसका उद्घाटन किया। ‘स्टोर पैलेस’ को मूल रूप से 19 वीं शताब्दी के अंत में बनाया गया था। इसी महल में, वर्ष 1919 में रावलपिंडी समझौता हुआ था, जिसके द्वारा अफगानिस्तान एक स्वतंत्र देश बना।
  5. भारत ने ‘आगा खान विरासत परियोजना’ और काबुल के दक्षिण में स्थित 6वीं शताब्दी में निर्मित ‘बाला हिसार किले’ के जीर्णोद्धार के लिए $1 मिलियन देने का वादा किया हुआ है। बाद में ‘बाला हिसार’, मुग़ल शासकों का एक महत्वपूर्ण किला बन गया और इसके कुछ हिस्सों को जहांगीर द्वारा पुनर्निर्मित करवाया गया था। शाहजहाँ ने इस किले को अपने आवास के लिए भी इस्तेमाल किया था।
  6. पाकिस्तान द्वारा स्थल-मार्गों से व्यापार करने की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद, भारत-अफगानिस्तान व्यापार में वृद्धि हो रही है, और इसके लिए वर्ष 2017 में एक हवाई माल-भाडा कॉरिडोर भी बनाया गया। दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2019-20 में 3 अरब डॉलर को पार कर गया।

भारत के लिए अफगानिस्तान का महत्व:

  • अफगानिस्तान इस क्षेत्र में भारत के सामरिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह दक्षेस देशों शायद एकमात्र ऐसा देश है, जिसके नागरिकों में भारत के प्रति बहुत लगाव है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ के बारे में सुना है? इसमें कौन से देश शामिल हैं? और इसके क्या उद्देश्य हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अफगानिस्तान में भारतीय परियोजनाओं का अवलोकन
  2. इन परियोजनाओं की अवस्थिति

मेंस लिंक:

अफगानिस्तान में स्थिर राजनीतिक स्थिति भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

पशुधन क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज


संदर्भ:

हाल ही में, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा ‘विशेष पशुधन सेक्टर पैकेज (9,800 करोड़ रुपये) के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी गयी है।

  • इसका उद्देश्य पशुधन क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देना है और पशुपालन क्षेत्र में संलग्न किसानों के लिए पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाना है।
  • इसमें राज्य सरकारों, राज्य सहकारिताओं, वित्तीय संस्थानों, बाहरी वित्तीय एजेंसियों और अन्य हितधारकों के निवेश भी शामिल हैं।

विवरण:

इस पैकेज को 2021-22 से शुरू होने वाले अगले पांच वर्षों के लिए पशुपालन और डेयरी विभाग की योजनाओं के विभिन्न घटकों को संशोधित और पुन: व्यवस्थित करके डिजाइन किया गया है।

इसके आधार पर विभाग की सभी योजनाओं को तीन वृहद विकास योजनाओं की श्रेणी में समाविष्ट कर दिया जायेगा।

  1. विकास कार्यक्रम: इनमें राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD), राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) और पशुधन की गणना तथा एकीकृत नमूना सर्वेक्षण (LC & ISS) को उप-योजनाओं के तौर पर शामिल किया गया है।
  2. रोग नियंत्रण कार्यक्रम: इसका नाम बदलकर ‘पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ (NADCP) रख दिया गया है। इसमें मौजूदा ‘पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण’ (LH & DC) और ‘राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ को भी शामिल किया गया है।
  3. अवसंरचना विकास निधि: ‘पशुपालन अवसंरचना विकास निधि’ (AHIDF) और ‘डेयरी अवसंरचना विकास निधि’ (DIDF) को आपस में मिला दिया गया है। इस तरह अवसंरचना विकास निधि तैयार की गई है। डेयरी गतिविधियों में संलग्न डेयरी सहकारिता और किसान उत्पादक संगठनों को भी इस तीसरी श्रेणी में शामिल कर लिया गया है, ताकि डेयरी सहकारिताओं को सहायता मिल सके।

पशुधन क्षेत्र का महत्व:

भारत में, बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर हैं। यह पशुधन क्षेत्र लगभग 55% ग्रामीण आबादी की आजीविका में सहयोग करता है।

  • साथ ही, भारत में पशुओं की संख्या विश्व में सर्वाधिक है।
  • 20 वीं पशुधन गणना के अनुसार, देश में पशुधन की कुल संख्या 78 मिलियन है, जो वर्ष 2012 की पशुधन गणना-की तुलना में 4.6% अधिक है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपराष्ट्रीय कामधेनु आयोग’ के बारे में जानते हैं? इसके क्या कार्य हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऊपर उल्लिखित योजनाओं की मुख्य विशेषताएं
  2. भारत में डेयरी क्षेत्र
  3. पशुधन गणना का अवलोकन
  4. विलय की गयी योजनायें

मेंस लिंक:

भारत के डेयरी क्षेत्र की क्षमता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।

मसौदा ड्रोन नियम 2021′


(Draft of ‘Drone Rules 2021’)

संदर्भ:

हाल ही में, नागर विमानन मंत्रालय द्वारा ‘ड्रोन नियम’, 2021 का संशोधित मसौदा जारी किया गया है। विश्वास, स्व-प्रमाणन और गैर-दखलंदाज निगरानी के सिद्धांत पर आधारित यह ‘ड्रोन नियम’, 2021,  इससे पहले जारी किए गए ‘यूएएस नियम’, 2021 (12 मार्च, 2021 को जारी) प्रतिस्थापित करेंगे।

प्रमुख परिवर्तन:

  1. डिजिटल स्काई प्लेटफार्म को व्यापार अनुकूल एकल खिड़की ऑनलाइन प्रणाली के तौर पर विकसित किया जायेगा।
  2. हरित क्षेत्रों में 400 फीट तक और हवाई अड्डे की परिधि से 8 से 12 किमी के बीच के क्षेत्र में 200 फीट तक ड्रोन उड़ाने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
  3. माइक्रो ड्रोन (गैर-व्यापारिक इस्तेमाल के लिये), नैनो ड्रोन और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिये पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।
  4. भारत में पंजीकृत विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा ड्रोन संचालन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
  5. ड्रोन और ड्रोन के पुर्जों के आयात को ‘विदेश व्यापार महानिदेशालय’ (DGFT) द्वारा नियमित किया जायेगा।
  6. पंजीकरण या लाइसेंस लेने के पहले सिक्योरिटी क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं होगी।
  7. अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिये उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र, विशिष्ट पहचान संख्या, पूर्वानुमति और रिमोट पायलट लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।
  8. ड्रोन नियम, 2021 के तहत ड्रोन कवरेज को 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है, और इसमें ड्रोन टैक्सी को भी शामिल किया गया है।
  9. उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी ‘भारतीय गुणवत्ता परिषद’ निभायेगी और उसके द्वारा अधिकृत संस्थायें यह प्रमाणपत्र जारी करेंगी।
  10. निर्माता, स्व-प्रमाणन के जरिये अपने ड्रोनों की विशिष्ट पहचान संख्या को डिजिटल स्काई प्लेटफार्म पर दे सकते हैं।
  11. ड्रोन नियम, 2021 के तहत अधिकतम जुर्माना घटाकर एक लाख रुपए कर दिया गया। बहरहाल, अन्य कानूनों की अवहेलना होने पर यह जुर्माना नहीं लगेगा।
  12. कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
  13. व्यापार अनुकूल नियम बनाने के लिये ड्रोन संवर्धन परिषद् की स्थापना की जाएगी।

कड़े नियमों और विनियमन की आवश्यकता:

  • हाल ही में, जम्मू में वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में विस्फोट किया गया था। इसके लिए विस्फोटकों को गिराने में पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था।
  • पिछले दो वर्षों में, भारतीय क्षेत्र में हथियारों, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए पाकिस्तान स्थित संगठनों द्वारा नियमित रूप से ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में पाकिस्तान से लगी सीमा पर 167 ड्रोन देखे गए और वर्ष 2020 में 77 ड्रोन देखे गए।
  • हालिया वर्षों के दौरा ‘ड्रोन प्रौद्योगिकी’ के तेजी से प्रसार और वैश्विक बाजार इसका तीव्र विकास होने से, विश्व के सबसे सुरक्षित शहरों में भी ड्रोन हमले की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  • वर्तमान में ड्रोन, विशेष रूप से, उन संघर्ष क्षेत्रों में जहां ‘गैर-राज्य अभिकर्ता’ (Non State Actors – NSA) सक्रिय हैं और प्रौद्योगिकी तक आसान पहुंच रखते हैं, सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि विश्व के कुछ देशों के पास खुद के सशस्त्र बल नहीं हैं? इन देशों के बारे में जानने हेतु पढ़िए

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘इंटरनेशनल कॉपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर – रुद्राक्ष’

हाल ही में, वाराणसी में ‘इंटरनेशनल कॉपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर – रुद्राक्ष’ का लोकार्पण किया गया।

  • इसको जापान की सहायता से निर्मित किया गया है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य लोगों को परस्पर सामाजिक और सांस्कृतिक अंतःक्रियाओं के अवसर प्रदान करना है।

 

विश्व युवा कौशल दिवस

(World Youth Skills Day)

वर्ष 2014 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा युवाओं को रोजगार, बेहतर काम और उद्यमिता के लिए कौशल-युक्त बनाने के रणनीतिक महत्व का जश्न मनाने के लिए 15 जुलाई को विश्व युवा कौशल दिवस के रूप में घोषित किया गया था।

  • यह दिवस, ‘इंचियोन घोषणा: एजुकेशन 2030 (Incheon Declaration: Education 2030) को अपनाए जाने को चिह्नित करता है। इंचियोन घोषणा, सतत विकास लक्ष्य-4 का एक हिस्सा है, और इसमें समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करने और सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
  • विश्व युवा कौशल दिवस 2021 की थीम – “महामारी-उपरांत युवा कौशल की पुनर्कल्पना” (Reimagining Youth Skills Post-Pandemic) है।

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