[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 January 2022 – PuuchoIAS


विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

1. आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन

2. सर क्रीक समझौता

3. दक्षिण चीन सागर विवाद

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सुअर के हृदय का प्रत्यारोपण

2. वन स्थिति रिपोर्ट 2021

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. सियाचिन ग्लेशियर

2. इसरो के नए प्रमुख

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘तमिलनाडु’ में ‘स्वास्थ्य अवसंरचनाओं और स्वास्थ्य अनुसंधान क्षेत्र में, खासकर जिला स्तर पर मौजूद महत्वपूर्ण अंतराल को दूर करने हेतु केंद्र सरकार द्वारा अगले पांच वर्षों में ‘प्रधान मंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन’ (Pradhan Mantri Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission) के तहत राज्य को 3,000 करोड़ रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की है।

इस योजना के बारे में:

  • इस योजना का उद्देश्य, देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
  • इस मिशन का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में, ‘गंभीर देखभाल सुविधाओं’ और ‘प्राथमिक देखभाल’ के बीच के अंतराल को भरना है।
  • इसके माध्यम से, देश के पांच लाख से अधिक आबादी वाले सभी जिलों में विशिष्ट ‘क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक’ के माध्यम से ‘क्रिटिकल केयर सेवाएं’ उपलब्ध होंगी, जबकि शेष जिलों को रेफरल सेवाओं के माध्यम से कवर किया जाएगा।
  • देश भर में प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के माध्यम से लोगों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में ‘नैदानिक ​​सेवाओं’ के पूर्ण विस्तार तक पहुंच प्राप्त होगी।
  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के माध्यम से एक आईटी-सक्षम ‘रोग निगरानी प्रणाली’ स्थापित की जाएगी।
  • सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं को ‘एकीकृत स्वास्थ्य सूचना पोर्टल’ के माध्यम से जोड़ा जाएगा, जिसका विस्तार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा।

योजना के अंतर्गत स्थापित किए जाने वाले संस्थान:

इस योजना के तहत, ‘एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान’, चार नए ‘राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान’, विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र हेतु एक क्षेत्रीय अनुसंधान मंच, जैव सुरक्षा स्तर- III सहित नौ प्रयोगशालाएं और रोग नियंत्रण के लिए पांच नए क्षेत्रीय राष्ट्रीय केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

योजना के लाभ और महत्व:

‘आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन’, विशेष ध्यान दिए जाने रहे 10 राज्यों में 17,788 ग्रामीण स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के लिए सहायता प्रदान करेगा। इसके अलावा, सभी राज्यों में 11,024 शहरी स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

भारत में ‘स्वास्थ्य अवसंरचनाओं’ का संक्षिप्त विवरण:

भारत को लंबे समय से एक देशव्यापी स्वास्थ्य प्रणाली की आवश्यकता महसूस की जा रही है। नीचे एक नवीनतम सर्वेक्षण के निष्कर्ष दिए गए हैं:

  • सर्वेक्षण किए गए, 70 प्रतिशत स्थानों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थी। तथापि, शहरी क्षेत्रों (87 प्रतिशत) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों (65 प्रतिशत) में इन सेवाओं की उपलब्धता कम थी।
  • 45 प्रतिशत स्थानों पर, लोग पैदल चलकर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सकते थे, जबकि 43 प्रतिशत स्थानों में उन्हें परिवहन का उपयोग करने की जरूरत पड़ती थी।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया, कि शहरी इलाकों में नजदीकी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अधिक थी: 64 प्रतिशत प्रगणकों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में लोग पैदल चलकर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सकते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 37 प्रतिशत को ही अपने नजदीक में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थीं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

हाल ही में, प्रधान मंत्री ने एक अन्य योजना, ‘आयुष्मान भारत राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ (ABDM) की शुरुआत की थी। इस मिशन में सभी व्यक्तियों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य आईडी (Digital Health ID) प्रदान की जाएगी, जिसमे व्यक्ति के पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़िए

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

सर क्रीक समझौता


(Sir Creek pact)

संदर्भ:

अतीत में ‘सियाचिन’ और ‘सर क्रीक’ (Sir Creek) को भारत और पाकिस्तान के बीच समाधान के लिए लंबे समय से ‘आसानी से हल किए जा सकने वाले मुद्दे’ (Low Hanging Fruits) बताया जाता रहा है। सियाचिन के मुद्दे पर दोनों देशों के मध्य रक्षा सचिव स्तर पर 13 दौर की वार्ता की जा चुकी हैं तथा इस विषय पर अंतिम वार्ता जून 2012 में हुई थी।

हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक कोई समाधान नहीं हो सका है।

‘सर क्रीक’ क्या है?

सर क्रीक (Sir Creek), कच्छ के रण की दलदली भूमि में भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित पानी की एक 96 किलोमीटर लंबी पट्टी है।

  • इस जल-धारा को मूल रूप से बाण गंगा के नाम से जाना जाता था, बाद में एक ब्रिटिश अधिकारी के नाम पर इसका नाम ‘सर क्रीक’ रख दिया गया।
  • सर क्रीक की यह धारा गुजरात के कच्छ क्षेत्र से पाकिस्तान के सिंध प्रांत को विभाजित करती हुई अरब सागर में जाकर गिरती है।

संबंधित विवाद:

सर क्रीक रेखा विवाद वस्तुतः कच्छ और सिंध के बीच समुद्री सीमा रेखा की अस्पष्ट व्याख्या में निहित है।

भारत की स्वतंत्रता से पहले, यह प्रांतीय क्षेत्र ब्रिटिश भारत के अधीन ‘बॉम्बे प्रेसीडेंसी’ का एक हिस्सा था। लेकिन 1947 में भारत की आजादी के बाद, सिंध क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा बन गया, जबकि कच्छ भारत का हिस्सा बना रहा।

  1. तत्कालीन सिंध सरकार और कच्छ के ‘राव महाराज’ के बीच हस्ताक्षरित ‘1914 के बॉम्बे सरकार के प्रस्ताव’ (Bombay Government Resolution of 1914) के पैराग्राफ 9 और 10 के अनुसार पाकिस्तान इस पूरे क्रीक क्षेत्र पर अपना दावा करता है।
  2. इस प्रस्ताव में, इन दोनों क्षेत्रों के बीच की सीमाओं का सीमांकन किया गया था, जिसके तहत ‘क्रीक’ को सिंध प्रांत में शामिल किया गया, तथा ‘क्रीक’ के पूर्वी किनारे को इस प्रांत की सीमा के रूप में निर्धारित किया गया, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘ग्रीन लाइन’ के रूप में जाना जाता है।
  3. लेकिन भारत का दावा है, यह सीमा जल-निकाय के बीच से होकर गुजरती है, जैसा कि 1925 में तैयार किए गए एक अन्य मानचित्र में दर्शाया गया है, और इस सीमा को वर्ष 1924 में जल-निकाय के बीच में ‘खम्भे’ गाड़कर निर्धारित किया गया था।
  4. भारत अपने समर्थन में, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून में वर्णित थालवेग सिद्धांत (Thalweg Doctrine) का हवाला देता है, जिसमें कहा गया है कि किसी जल-निकाय के नौगम्य होने पर दो राज्यों के मध्य सीमा को नदी की धारा के बीच से विभाजित किया जा सकता है।

सर क्रीक का महत्व:

  • रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के अलावा, ‘सर क्रीक’ (Sir Creek) का मुख्य महत्व मत्स्यन संसाधनों को लेकर है। ‘सर क्रीक’ को एशिया के सबसे बड़े मत्स्यन क्षेत्रों में से एक माना जाता है।
  • इसके महत्व का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण, इस क्षेत्र में समुद्र के नीचे तेल और गैस की बड़ी मात्रा की संभावित मौजूदगी है। इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के कारण वर्तमान में इस संपदा का कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत और उसके पड़ोसियों के बीच विवादित क्षेत्र
  2. इन स्थानों की अवस्थिति
  3. भारत की स्थलीय तथा समुद्री सीमा
  4. खराई ऊंट (Kharai camels)
  5. कच्छ के रण में प्रवाहित होने वाली नदियाँ
  6. विश्व में सबसे बड़ा मछली उत्पादक

मेंस लिंक:

सर क्रीक कहाँ अवस्थित है? इससे संबंधित विवादों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

दक्षिण चीन सागर विवाद


संदर्भ:

बीजिंग द्वारा ‘दक्षिणी चीन सागर’ (South China Sea) में व्यापक क्षेत्र पर “ऐतिहासिक अधिकारों” के दावों को अमेरिकी विदेश विभाग की एक नई रिपोर्ट ने उन्हें “अंतर्राष्ट्रीय कानून के साथ स्पष्ट रूप से असंगत” बताते हुए खारिज कर दिया है।

महत्वपूर्ण रूप से, रिपोर्ट का यह निष्कर्ष है कि चीन द्वारा किए जाने वाले ये दावे ‘महासागरों में कानून-व्यवस्था’ और ‘अभिसमय’ में परिलक्षित सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय कानून के कई प्रावधानों को गंभीर रूप से कमजोर करते हैं।

‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ के तहत वर्ष 2016 में किया गया निर्णय:

‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (United Nations Convention on Law of Seas – UNCLOS) के तहत वर्ष 2016 में किया गया निर्णय, चीन द्वारा किए जाने वाले के दावों के लिए एक गंभीर झटका था। यह निर्णय ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ पर आधारित था, जिस पर चीन द्वारा अभिपुष्टि की जा चुकी है।

UNCLOS निर्णय के प्रमुख बिंदु:

  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री अधिकरण द्वारा सुनाए गए इस निर्णय में, दक्षिणी चीन सागर में ‘नाइन-डैश-लाइन’ के अंतर्गत आने वाले संपूर्ण क्षेत्र पर बीजिंग के दावों को खारिज कर दिया गया।
  • निर्णय में “द्वीपों” की परिभाषा को स्पष्ट किया गया था। इसमें पाया गया कि ‘इटू अबा’ (Itu Aba), थिटू (Thitu), स्प्रैटली आइलैंड्स (Spratly Islands), नॉर्थईस्ट केय (Northeast Cay) और साउथवेस्ट केय (Southwest Cay) सहित कोई भी आइलैंड्स कानूनी रूप से ‘द्वीप’ नहीं है क्योंकि इनमे से कोई भी द्वीप किसी स्थाई समुदाय या स्वतंत्र आर्थिक जीवन को बनाए रखने में सक्षम नहीं है।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय समुद्री अधिकरण ने फिलीपींस के साथ इस बात पर भी सहमति जताई कि इस क्षेत्र में अवस्थित जॉनसन रीफ, क्वार्टरॉन रीफ और ‘फेयरी क्रॉस रीफ’ कोई द्वीप न होकर मात्र समुद्री चट्टानें हैं। ‘ह्यूजेस रीफ’ और ‘मिसचीफ रीफ’ को उच्च ज्वार की जल सीमा के नीचे पाया गया, जिससे इन पर किसी प्रकार के समुद्री अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता है।
  • अधिकरण ने यह भी फैसला सुनाया कि दूसरा ‘थॉमस शोल’ और ‘रीड बैंक’ जलमग्न हैं और फिलीपींस के महाद्वीपीय शेल्फ से जुड़े हुए हैं, अतः इन पर चीन का कोई अधिकार नहीं है।
  • गौरतलब है कि अधिकरण ने चीनी ‘भूमि-पुनर्ग्रहण कार्रवाई’ के खिलाफ भी यह कहते हुए फैसला सुनाया कि इसकी वजह से ‘प्रवाल-भित्त पर्यावरण को गंभीर नुकसान’ हुआ है। तथा अधिकरण ने चीन की ‘भूमि पुनर्ग्रहण कार्रवाईयों’ की कड़ी आलोचना भी की।
  • अधिकरण ने चीन द्वारा स्कारबोरो शोल पर अपना कब्ज़ा करने के प्रयास में फिलीपींस के अधिकारों का उल्लंघन किए जाने की पुष्टि की। वर्ष 2012 में चीन द्वारा की गयी इस कार्रवाई को लेकर ही मनीला ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री अधिकरण के समक्ष मुकदमा दायर किया था।
  • अधिकरण के अनुसार, चीन ने रीड बैंक के समीप तेल और गैस की खोज करके फिलीपींस के संप्रभु अधिकारों का उल्लंघन किया था।

समग्र प्रकरण:

दक्षिणी चीन सागर में, बीजिंग द्वारा कई दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के साथ अतिव्यापी क्षेत्रीय दावा किया जाता रहा है।

  • दक्षिणी चीन सागर पर ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम अपना दावा करते हैं, जबकि चीन, संसाधन-समृद्ध लगभग पूरे समुद्रीय क्षेत्र पर अपना प्रतिस्पर्धी दावा करता है। विदित हो कि, अरबों डॉलर सालाना का व्यापार करने वाले जहाज इस क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।
  • बीजिंग पर जहाज-रोधी मिसाइलों और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों सहित सैन्य उपकरण तैनात करने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, चीन द्वारा वर्ष 2016 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए के एक फैसले को भी अनदेखा किया गया है, जिसमे चीन द्वारा अधिकांश जल-क्षेत्र पर किए जा रहे ऐतिहासिक दावे को बिना आधार के घोषित किया गया था।

‘दक्षिण चीन सागर’ की अवस्थिति:

दक्षिण चीन सागर, दक्षिण पूर्व एशिया में पश्चिमी प्रशांत महासागर की एक शाखा है।

  • यह, चीन के दक्षिण, वियतनाम के पूर्व और दक्षिण, फिलीपींस के पश्चिम और बोर्नियो द्वीप के उत्तर में अवस्थित है।
  • यह, ताइवान जलडमरूमध्य द्वारा ‘पूर्वी चीन सागर’ और ‘लूजॉन स्ट्रेट’ के माध्यम से ‘फिलीपीन सागर’ से जुड़ा हुआ है।
  • सीमावर्ती देश और भू-भाग: जनवादी चीन गणराज्य, चीन गणराज्य (ताइवान), फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, सिंगापुर और वियतनाम।

सामरिक महत्व:

  • ‘दक्षिणी चीन सागर’ अपनी अवस्थिति के कारण सामरिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर (मलक्का जलसन्धि) के बीच संपर्क-कड़ी है।
  • ‘संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास अभिसमय’ (United Nations Conference on Trade And Development- UNCTAD) के अनुसार, वैश्विक नौपरिवहन का एक-तिहाई भाग ‘दक्षिणी चीन सागर’ से होकर गुजरता है, जिसके द्वारा अरबों का व्यापार होता है। इस कारण भी यह एक महत्वपूर्ण भूराजनीतिक जल निकाय है।

दक्षिणी चीन सागर में अवस्थित द्वीपों पर विभिन्न देशों के दावे:

  • पारसेल द्वीप समूह’ (Paracels Islands) पर चीन, ताइवान और वियतनाम द्वारा दावा किया जाता है।
  • स्प्रैटली द्वीप समूह’ (Spratley Islands) पर चीन, ताइवान, वियतनाम, ब्रुनेई और फिलीपींस द्वारा दावा किया जाता है।
  • स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) पर फिलीपींस, चीन और ताइवान द्वारा दावा किया जाता है।
  • वर्ष 2010 से, चीन द्वारा निर्जन टापुओं को, ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) के अंतर्गत लाने के लिए, कृत्रिम टापुओं में परिवर्तित किया जा रहा है। (उदाहरण के लिए, हेवन रीफ, जॉनसन साउथ रीफ और फेरी क्रॉस रीफ)।

Current Affairs

 

 इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘सात सागर’ (The Seven Seas) वाक्यांश का अर्थ जानते हैं?

क्या आपने समुद्रों के नामकरण और उनसे जुड़ी समस्याएं के बारे में सोचा है? इस बारे में जानकारी हेतु संक्षेप में पढ़िए

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘दक्षिणी चीन सागर’ में पक्षकारों के बरताव पर घोषणा के बारे में।
  2. विवाद में शामिल देश
  3. नाइ-डैश लाइन क्या है?
  4. इस क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण खाड़ियाँ, मार्ग एवं सागर
  5. विवादित द्वीप और उनकी अवस्थिति
  6. UNCLOS क्या है?
  7. ताइवान स्ट्रेट और लूजॉन स्ट्रेट की अवस्थिति

मेंस लिंक:

दक्षिण चीन सागर विवाद पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

सुअर के हृदय का प्रत्यारोपण


(Pig heart transplant)

संदर्भ:

अमेरिका में सर्जनों द्वारा एक साहसिक प्रयास में, एक मानव रोगी के अंदर एक सुअर के हृदय का प्रत्यारोपण किया गया है। चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में इस तरह का पहला उदहारण है।

यह सफलता, संभवतः एक स्वस्थ अंग प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के वर्षों लंबे इंतजार को समाप्त कर सकती है और संभावनाओं की एक नई दुनिया खोल सकती है।

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन:

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन (Xenotransplantation), विभिन्न प्रजातियों के सदस्यों के बीच अंगों या ऊतकों को ग्राफ्टिंग या ट्रांसप्लांट करने की प्रक्रिया है।

दशकों से आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा इसका अनुसरण किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के लिए किसी दूसरी प्रजाति के किसी अंग को, प्रतिरोपित किए जाने वाले व्यक्ति की ‘प्रतिरक्षा प्रणाली’ द्वारा अस्वीकार किए जाने और रोगियों के लिए इसके घातक परिणाम होने संबंधी चुनौती को पार करना मुश्किल रहा है।

Current Affairs

 

प्रत्यारोपण- विधि:

  • सुअर से लिए गए प्रत्यारोपित किए जाने वाले हृदय को ‘आनुवंशिक रूप से संशोधित’ किया गया। इस प्रक्रिया के दैरान, वैज्ञानिकों ने ‘मनुष्यों के शरीर में सुअर के अंगों को अस्वीकार करने वाले तीन जीनो (Genes) तथा ‘सुअर के हृदय के ऊतकों की अत्यधिक वृद्धि के लिए जिम्मेदार जीन’ को हटा दिया।
  • इसके अलावा, मानव शरीर द्वारा किसी अन्य प्रजाति के अंग को स्वीकृति की सुविधा प्रदान करने वाले छह मानव जीनों को ‘सुअर के जीनोम’ में प्रविष्ट कराया गया। अर्थात, इस ऑपरेशन में अमेरिकी बायोटेक फर्म रेविविकोर (Revivicor) द्वारा सुअर में कुल 10 अद्वितीय जीनों को संपादित किया गया।

प्रत्यारोपण हेतु ‘सूअर का हृदय’ इस्तेमाल किए जाने का कारण:

अंग प्रत्यारोपण के लिए ‘सूअर’ तेजी से लोकप्रिय प्रार्थक बनते जा रहे हैं। इसका कारण यह है, क्योंकि इसके अंग काफी हद तक शारीरिक रूप से मनुष्यों के समान होते हैं। इसके अलावा, ‘सुअर के अंग’  आनुवंशिक इंजीनियरिंग के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।

अंगो की कमी संबंधी समस्या:

  • भारत में, रोगियों को सालाना 25,000-30,000 यकृत प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। लेकिन केवल 1,500 रोगियों को ही यह मिल पाता है।
  • इसी प्रकार, लगभग 50,000 व्यक्ति प्रतिवर्ष हृदय गति रुकने से मर जाते हैं। फिर भी, हर साल लगभग 10-15 हृदय प्रत्यारोपण ही किए जाते हैं।
  • अंगों की अस्वीकृति, प्रत्यारोपण प्रक्रिया में आने वाली सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। वैज्ञानिकों ने सूअरों के अंगों में आनुवंशिक रूप से परिवर्तन करके इस समस्या का समाधान किया है।

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन के शुरुआती प्रयास:

1970 के दशक में गैर-मानव प्राइमेट (नरवानर) से मनुष्यों में गुर्दे, यकृत और हृदय प्रत्यारोपण का एक सिलसिला शुरू हुआ था, लेकिन इनमे से अधिकांश प्रत्यारोपण विफल रहे।

  • इस विफलता का मुख्य कारण, मानव शरीर द्वारा ‘अन्य प्रजाति के अंगों की अस्वीकृति’ थी मानव प्रतिरक्षा प्रणाली, मानव-शरीर के लिए बाह्य-प्रजाति के कारकों को अस्वीकार कर दिया जाता है। प्रत्यारोपण विफलता के लिए कुछ सर्जिकल जटिलताएं भी जिम्मेदार थीं।
  • 1984 में, एक मानव शिशु में एक कपि / बबून (Baboon) का ह्रदय प्रत्यारोपित किया गया। प्रत्यारोपण के 21 दिन बाद शिशु की मृत्यु हो गई।
  • 1990 के दशक में प्राइमेट्स को प्रत्यारोपण प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, क्योंकि इनसे वायरस फैलने के खतरा काफी अधिक था। इसके बाद ‘सूअर’ प्रत्यारोपण के लिए चर्चा के केंद्र में आ गए।

अब तक की सफलताएँ:

  • 2017 में, चीनी सर्जनों ने कथित तौर पर मानव में दृष्टि बहाल करने के लिए सुअर के कॉर्निया को प्रत्यारोपित किया।
  • 2020 में, अमेरिकी विशेषज्ञों द्वारा आनुवंशिक रूप से परिवर्तित किडनी को ब्रेन-डेड व्यक्ति से जोड़ने में सफलता हासिल की।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘हेपरिन’ (Heparin) के बारे में जानते हैं? ‘हेपरिन’ एक थक्कारोधी (Anticoagulant) यौगिक होता है जो सर्जरी के दौरान रक्त के थक्कों को बनने से रोकता है। इसे कुछ चिकित्सीय स्थितियों में भी उपयोग किया जाता है। यह यौगिक सूअरों से प्राप्त होता है। वैज्ञानिकों ने सूअरों से प्राप्त ‘हेपरिन’ को गायों या कुत्तों से प्राप्त की ‘हेपरिन’ तुलना में अधिक स्वच्छ पाया है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जीन एडिटिंग के बारे में
  2. जीन एडिटिंग तकनीक
  3. ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन

मेंस लिंक:

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2021


संदर्भ:

हाल ही में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट’ / ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021’ (India State of Forest Report – ISFR) जारी की गयी है।

भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा तैयार की गयी इस द्विवार्षिक रिपोर्ट में देश के वन संसाधनों का आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  • देश का कुल वन और वृक्षों से भरा क्षेत्र 9 मिलियन हेक्टेयर हैं जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 24.62 प्रतिशत है।
  • 2019 के आकलन की तुलना में देश के कुल वन और वृक्षों से भरे क्षेत्र में 2,261 वर्ग किमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें आंध्र प्रदेश ने 647 वर्ग किलोमीटर के अधिकतम वन क्षेत्र का विकास किया है।
  • इसमें से वनावरण में 1,540 वर्ग किमी और वृक्षों से भरे क्षेत्र में 721 वर्ग किमी की वृद्धि पाई गई है।
  • वन आवरण में सबसे ज्यादा वृद्धि खुले जंगल में देखी गई है, उसके बाद यह बहुत घने जंगल में देखी गई है।
  • वन क्षेत्र में वृद्धि के मामले में शीर्ष पांच राज्य आंध्र प्रदेश (647 वर्ग किमी), तेलंगाना (632 वर्ग किमी), ओडिशा (537 वर्ग किमी), कर्नाटक (155 वर्ग किमी) और झारखंड (110 वर्ग किमी) हैं।
  • वन आच्छादन में बढ़ोत्तरी या वनावरण घनत्व में सुधार के लिए बेहतर संरक्षण उपायों, संरक्षण, वनीकरण गतिविधियों, वृक्षारोपण अभियान और कृषि वानिकी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
  • देश के बड़े शहरों में, अहमदाबाद वन क्षेत्र के मामले में सबसे ज्यादा पिछड़ा शहर रहा है।

अधिकतम वनावरण वाले राज्य:

  • क्षेत्रफल के हिसाब से, मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र का स्थान है।
  • 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का 33 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र वन आच्छादित है।
  • इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से पांच राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों जैसे लक्षद्वीप, मिजोरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में 75 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र हैं।

देश में मैंग्रोव कवर:

  • देश में कुल मैंग्रोव क्षेत्र 4,992 वर्ग किमी है।
  • 2019 के पिछले आकलन की तुलना में मैंग्रोव क्षेत्र में 17 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • मैंग्रोव क्षेत्र में वृद्धि दिखाने वाले शीर्ष तीन राज्य ओडिशा (8 वर्ग किमी), इसके बाद महाराष्ट्र (4 वर्ग किमी) और कर्नाटक (3 वर्ग किमी) हैं।

कार्बन स्टॉक:

  • देश के जंगल में कुल कार्बन स्टॉक 7,204 मिलियन टन होने का अनुमान है।
  • वर्ष 2019 के अंतिम आकलन की तुलना में देश के कार्बन स्टॉक में 4 मिलियन टन की वृद्धि हुई है।
  • कार्बन स्टॉक में वार्षिक वृद्धि 7 मिलियन टन है।

चिंताएं:

  • पूर्वोत्तर राज्यों ने सकारात्मक परिणाम नहीं दिखाए हैं, क्योंकि वर्तमान आकलन के अनुसार इस क्षेत्र में 1,020 वर्ग किमी की सीमा तक वन आवरण में कमी देखी गई।
  • अरुणाचल प्रदेश में 257 वर्ग किमी का अधिकतम वन क्षेत्र नष्ट हो गया है, इसके बाद मणिपुर में 249 वर्ग किमी, नागालैंड में 235 वर्ग किमी, मिजोरम में 186 वर्ग किमी और मेघालय में 73 वर्ग किमी वन क्षेत्र का नुकसान हुआ है।
  • पिछले दो वर्षों में देश के कुल 140 पहाड़ी जिलों के वन क्षेत्र 902 वर्ग किमी की कमी आयी है। 2019 की रिपोर्ट में, पहाड़ी क्षेत्रों में वन क्षेत्र में 544 वर्ग किमी की वृद्धि हुई थी।

देश में वन आच्छादन बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयास:

2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के अतिरिक्त ‘कार्बन सिंक’ को बढ़ाने संबंधी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत में, वृक्षावरण में वृद्धि करने हेतु ‘नगर वन योजना’ का आरंभ किया गया है। यह योजना अगले पांच वर्षों के लिए शुरू किए गए ‘हरित मिशन’ के दूसरे चरण में शामिल की जा चुकी है।

वन सर्वेक्षण रिपोर्ट (ISFR 2021) के महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. वर्तमान ISFR 2021 में, ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ (FSI) ने भारत के टाइगर रिजर्व, कॉरिडोर और शेर संरक्षण क्षेत्र में वन आवरण के आकलन से संबंधित एक नया अध्याय शामिल किया है।
  2. इस संदर्भ में, टाइगर रिजर्व, कॉरिडोर और शेर संरक्षण क्षेत्र में वन आवरण में बदलाव पर यह दशकीय मूल्यांकन वर्षों से लागू किए गए संरक्षण उपायों और प्रबंधन के प्रभाव का आकलन करने में मदद करेगा।
  3. ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ की नई पहल के तहत एक नया अध्याय जोड़ा गया है, जिसमें ‘जमीन से ऊपर बायोमास’ (Above Ground Biomass – AGB) का अनुमान लगाया गया है। FSI ने अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC), इसरो, अहमदाबाद के सहयोग से सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) डेटा के एल-बैंड का उपयोग करते हुए अखिल भारतीय स्तर पर जमीन से ऊपर बायोमास (AGB) के आकलन के लिए एक विशेष अध्ययन शुरू किया है।
  4. ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ ने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS) पिलानी के गोवा कैंपस के सहयोग से ‘भारतीय वनों में जलवायु परिवर्तन हॉटस्पॉट की मैपिंग’ पर आधारित एक अध्ययन किया है। यह सहयोगात्मक अध्ययन भविष्य की तीन समय अवधियों यानी वर्ष 2030, 2050 और 2085 के लिए तापमान और वर्षा डेटा पर कंप्यूटर मॉडल-आधारित अनुमान का उपयोग करते हुएभारत में वनावरण पर जलवायु हॉटस्पॉट का मानचित्रण करने के उद्देश्य से सहयोगात्मक अध्ययन किया गया था।
  5. रिपोर्ट में राज्य/केंद्र शासित क्षेत्र के अनुसार विभिन्न मापदंडों पर भी जानकारी शामिल है। रिपोर्ट में पहाड़ी, आदिवासी जिलों और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में वनावरण पर विशेष विषयगत जानकारी भी अलग से दी गई है।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


सियाचिन ग्लेशियर

  • सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier), हिमालय की पूर्वी काराकोरम श्रेणी में स्थित है।
  • यह विश्व के गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में अवस्थित दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर है।
  • सियाचिन ग्लेशियर यूरेशियन प्लेट को भारतीय उपमहाद्वीप से अलग करने वाले ‘महान जल विभाजक’ के ठीक दक्षिण में स्थित है।

चर्चा का कारण:

  • सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने हाल ही में कहा है, कि भारत सियाचिन ग्लेशियर के विसैन्यीकरण के खिलाफ नहीं है, किंतु इसके लिए पाकिस्तान को दोनों देशों की स्थिति को विभाजित करने वाली ‘वास्तविक ग्राउंड पोजिशन लाइन’ (AGPL) को स्वीकार करना होगा।
  • सेना प्रमुख ने कहा, कि सियाचिन का सैन्यीकरण 1984 के अंत में पाकिस्तान द्वारा यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने के प्रयास का परिणाम था, जिसकी वजह से भारत को जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

 

इसरो के नए प्रमुख

‘एस सोमनाथ’ को हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दसवां अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

  • वह इस सप्ताह के अंत में निवर्तमान अध्यक्ष ‘के सिवन’ के सेवानिवृत्त होने पर अंतरिक्ष विभाग के सचिव और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।

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